मगध साम्राज्य
• ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में मगुध सर्वाधिक शक्तिशा महाजनपद था ।
• प्राचीन भारत में साम्राज्यवाद की शुरूआत या विकास का श्रेय मगध | दिया जाता है ।
हर्यक वंश ( 544 ई . पू . - 412 ई . पू . )
• मगध साम्राज्य की महत्ता का वास्तविक संस्थापक विम्बिस ( 544 - ई . पू . - 492 ई . पू . ) था । उसकी राजधानी गिरिव्रज ( राजगृह ) थी ।
• बिम्बिसार ने वैवाहिक सम्बन्धों के आधार पर अपनी राजनीतिक स्थिति सुदृढ़ की ।
• बिम्बिसार ने अपने राजकीय चिकित्सक ‘ जीवक ' को पड़ोसी राज्य अवन्ति के शासक चण्डप्रद्योत महासेन की चिकित्सा के लिए भेजा था।
• बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ( 492 ई . पू . - 460 ई . पू . ) ने बन्दै । बनाकर सत्ता पर कब्जा जमाया । अजातशत्रु को कुणिक ' के नाम से भी जाना जाता है ।
• अजातशत्रु ने वज्जि संघ के लिच्छवियों को पराजित करने के लिए । ‘ रथमूसल ' एवं ' महाशिलाकण्टक ' नामक नये हथियारों का प्रयोग किया
अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह के सप्तपणि गुफा में प्रथम बौद । संगीति का आयोजन हुआ था ।
अजातशत्रु का पुत्र उदयिन ( उदयभद्र ) ( 460 ई . पू . - 444 ई . पू . ) हर्यक वंश का तीसरा महत्त्वपूर्ण शासक था , उसने पाटलिपुत्र ( वर्तमान पटना । की स्थापना की तथा उसे अपनी राजधानी बनाया ।
शिशुनाग वंश ( 412 ई . पू . - 344 ई . पू . )
हर्यक वंश के सेनापति शिशुनाग ने मगध की सत्ता पर कब्जा कर ।शिशुनाग वंश की स्थापना की ।
• इस वंश के शासक कालाशोक ( काकवर्ण ) के शासनकाल में मगध की राजधानी वैशाली थी , जहाँ द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ ।
नन्द वंश ( 344 ई . पू . - 324 ई . पू . )
• नन्द वंश का संस्थापक महापद्मनन्द था ।उसे सर्वक्षत्रान्तक अर्थात् ‘ सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला ' कहा गया है ।
• महापद्मनन्द ने एकछत्र राज्य की स्थापना की तथा ‘ एकराट ' की उपाधि धारण की ।
• नन्द वंश का अन्तिम शासक धननन्द था ।इसी के शासनकाल में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था ।सिकन्दर का भारत अभियान
* सिकन्दर मेसीडोनिया ( मकदूनिया ) के क्षत्रप फिलिप का पुत्र था ।
*अपने विश्व विजय की योजना के अन्तर्गत सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया
*झेलम तथा चिनाब के मध्यवर्ती प्रदेश के शासक पौरस ( पुरा ) ने सिकन्दर का ।प्रतिरोध किया ।सिकन्दर एवं पोरस के बीच 326 ई .पू .में झेलम नदी के किनारे भीषण युद्ध हुआ , जिसमें पोरस की हार हुई ।इस युद्ध को ' वितरता का युद्ध ' या ‘ हाइडेस्पीज का युद्ध के नाम से जाना जाता है ।
• बाद में सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी के आगे बढ़ने से इनकार कर दिया अन्ततः सिकन्दर को वापस लौटना पड़ा • वापस लौटते समय 323 ई .पू .में बेबीलोन में सिकन्दर की मृत्यु हो गई ।
मगध साम्राज्य
चन्द्रगुप्त मौर्य ( 322 ई . पू . - 298 ई . पू . ) ने चाणक्य की सहायता से नन्द वंश के शासक धननन्द को अपदस्थ कर मौर्य साम्राज्य के स्थापना की ।
• सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपने राजदृत के रूप में चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा था ।
• सेन्ड्रोकोट्स की पहचान चन्द्रगुप्त के रूप में सर्वप्रथम ' विलियम जोन्स ने की ।
• चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने अन्तिम समय में जैन भिक्षु मुद्रबाहु से देश लेकर श्रवणबेलगोला में कायाक्लेश के द्वारा प्राण त्याग दिया ।
• बिन्दुसार ( 298 ई . पू . - 272 ई . पू . ) को ‘ अमित्रघात ' के नाम से भी जाना जाता है । वह आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था ।
• विन्दुसार ने सीरिया के शासक एण्टियोकस से अंजीर मदिरा तथा एक दार्शनिक की माँग की थी ।
• अशोक ( 278 ई . पू . - 236 ई . ) अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए प्रतिपादित ' धम्म ' के लिए विश्व विख्यात है ।
• अशोक ने अपने शासन के 8वें वर्ष ' ( 261 ई . पू . ) में कलिग पर आक्रमण किया तथा उसे जीत लिया ।
• कलिग के साथ हुए युद्ध में भारी तपात को देख अशोक ने युद्ध नीति को छोड़ ‘ धुम्म नीति ' का पालन किया ।
• अशोक ने अपने बड़े भाई सुमन के पुत्र ‘ निग्रोध से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को अपनाया । बाद में उपगुप्त ने उसे बौद्ध धर्म में दीक्षित किया ।
अशोक के धम्म की परिभाषा ‘ राहलोवादसूत्त ' से ली गई है ।
• अशोक के कलिग युद्ध तथा हृदय परिवर्तन की जानकारी उसके 13वें शिलालेख से मिलती है ।
• अशोक ने अपने शासकीय एवं राजकीय आदेशों को शिलालेखों पर खुदवाकर साम्राज्य के विभिन्न भागों में स्थापित किया ।
• ये शिलालेख ब्राह्मी ’ , ‘ खरोष्ठी , ‘ अरामाईक ' तथा ' ग्रीक ' लिपि में हैं ।
• अशोक के शिलालेखों का पता सर्वप्रथम टी , फैन्थेलर ने लगाया तथा इसे पढ़ने में सर्वप्रथम सफलता जेम्स प्रिंसेप को मिली ।
• मौर्य साम्राज्य में उच्च स्तर के अधिकारियों को तीर्थ ' कहा जाता था , जिनकी संख्या 18 बताई गई है ।
• कौटिल्य ( चाणक्य ) के अर्थशास्त्र ' तथा मेगस्थनीज के इण्डिका ' से मौर्य साम्राज्य के बारे में विशेष जानकारी मिलती है ।
मौर्योत्तर काल में विदेशी आक्रमण
यवन
• मौर्योत्तर काल में भारत पर सबसे पहला विदेशी आक्रमण बैक्ट्रिया के ग्रीकों ने किया । इन्हें ' हिन्द - यवन ' या ' इण्डोग्रीक ' के नाम से भी जाना जाता है ।
* हिन्द - यवन शासकों में मिनाण्डर सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है । उसकी राजधानी साकल थी ।
* प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक नागसेन के साथ मिनाण्डर ( मिलिन्द ) के द्वारा किये गए वाद - विवाद का विस्तृत वर्णन ' मिलिन्दपन्हो ' नामक ग्रन्थ में है ।
* इण्डो - ग्रीक शासकों ने भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के तथा ' लेखयुक्त सिक्के ’ जारी किये ।
* विभिन्न ग्रहों के नाम , नक्षत्रों के आधार पर भविष्य बताने की कला , सम्वत् तथा सप्ताह के सात दिनों का विभाजन यूनानियों ने भारत को सिखलाया ।
शक
• शक मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे ।
• शक शासकों में रुद्रदामन प्रथम प्रमुख था । जूनागढ़ से प्राप्त उसका अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला अभिलेख है ।
• रुद्रदामन प्रथम ने चन्द्रगुप्त मौर्य के समय निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया था ।
पहलव ( पार्थियन )
• पहलव मूलतः पार्थिया के निवासी थे ।
• पहलवों का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक गोन्दोफर्निस था । उसके शासनकाल में ईसाई धर्म - प्रचारक सेण्ट टॉमस भारत आया था ।
कुषाण
• कुषाण यू - ची जनजाति से सम्बन्धित थे । वे पश्चिमी चीन से भारत आये थे ।
• कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था । कनिष्क ने 78 ई . में शक सम्वत् को प्रचलित किया ।
• कनिषक ने पुरुषपुर ( पैशावर ) को अपनी राजधानी बनाया । मथुरा कनिष्क | को द्वितीय राजधानी थी ।
• करमौर में कनिष्क ने कनिष्कपुर नामक नगर की स्थापना की ।
• कनिष्क बौद्ध धर्म का अनुयायी था । उसके शासनकाल में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन कुण्डल वन ( कश्मीर ) में हुआ था ।
गुप्त साम्राज्य
गुप्त वंश का प्रथम महत्त्वपूर्ण शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था , लेकिन इसके पहले श्रीगुप्त ( 240 - 285 ई . ) तथा घटोत्कच ( 280 - 320 ई . ) का शासक के रूप में उल्लेख मिलता है ।
• चन्द्रगुप्त प्रथम ( 319 - 350 ई . ) ने 320 ई . में गुप्त सम्वत् की शुरूआत की । उसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी ।
• चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था , जो उस समय की महत्त्वपूर्ण घटना थी ।
• समुद्रगुप्त ( 350 - 375 ई . ) चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था । विभिन्न अभियानों | के कारण इतिहासकार वी . ए . स्मिथ ने उसे ‘ भारत का नेपोलियन कहा ।
• समुद्रगुप्त की विजयों और उसके बारे में जानकारी के स्रोत उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख है ।
• समुद्रगुप्त की अनुमति से सिंहल ( श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में एक बौद्ध मठ स्थापित किया था । • समुद्रगुप्त के सिक्कों पर उसे वीणा बजाते हुए दिखाया गया है ।
• चन्द्रगुप्त द्वितीय ( 375 - 415 ई . ) का काल गुप्तकाल में साहित्य और कला का स्वर्ण - काल कहा जाता है ।
• चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शकों को पराजित कर ‘ विक्रमादित्य ' की उपाधि धारण की तथा चाँदी सिक्के चलाये
• चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चीनी यात्री फाह्यान ( 399 - 412 ई . ) भारत आया था ।
• उसके दरबार में नौ विद्वानों की मण्डली थी जिसे नवरत्न ' कहा जाता था । इस नवरल में कालिदास अमर सिंह आदि शामिल थे ।
कुमार गुप्त प्रथम ( 415 - 455 ई . ) के समय में नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी ।
• स्कन्दगुप्त ( 455 - 467 ई . ) गुप्त वंश का अन्तिम प्रतापी शासक था । उसने हूणों के आक्रमण को विफल किया था ।
• स्कन्दगुप्त ने भी चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा के समय निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया था ।
• गुप्तकालीन प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ‘ ग्राम ' थी , जिसका प्रशासन ग्रामिक के हाथ में होता था ।
• कई गाँवों को मिलाकर पेठ बनते थे ।
• भारत में मन्दिरों का निर्माण गुप्तकाल से शुरू हुआ । देवगढ़ का । दशावतार मन्दिर गुप्तकाल का सबसे उत्कृष्ट मन्दिर है ।
• गुप्तकालीन बौद्ध गुफा मन्दिरों में अजन्ता एवं बाघ की गुफाएँ प्रमुख हैं ।
• गुप्त शासकों की राजकीय या आधिकारिक भाषा संस्कृत थी ।
• गुप्तकाल में ' भाग ' एवं ' भोग ' राजस्य कर था , ' भाग ' उपज का हिस्सा होता था जबकि भोग सब्जी तथा फलो के रूप में दी जाती थी ।
पुष्यभूति वंश
• पुष्यभूति देश की स्थापना थानेश्वर में हुई थी । इस वंश का पहला महत्त्वपूर्ण शासक प्रभाकरवर्द्धन था ।
• हर्षवर्धन ( G06 - 017 ई . ) इस वंश का महान् शासक था । उसने अपने राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानान्तरित की ।
• बाणभट्ट हर्ष का दरबारी कवि था । उसने ‘ हर्षचरित ' की रचना की । ने स्वयं ' नागानन्द ' , ' रत्नावली ' एवं ' प्रियदर्शिका ' नामक नाटकों को रचना की थी ।
• हर्ष का चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय से नर्मदा नदी तट पर युद्ध हुआ था , जिसमें हर्ष की पराजय हुई थी ।
• हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री हेनसांग भारत आया था । उसका यात्रा - वृत्तांत ' सी - यू - की के नाम से जाना जाता है ।
गुप्तोत्तर वंश
• पल्लव वंश की स्थापना सिंहविष्णु ने की थी । इसकी राजधानी काँची ( काँचीपुरम ) थी ।
• ‘ मत्तविलास प्रहसन ' की रचना पल्लव नरेश महेन्द्र वर्मन ने की ।
• महाबलीपुरम् के रथ मन्दिर का निर्माण पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम के समय हुआ था । उसने वातापीकोड की उपाधि ग्रहण की ।
• राष्ट्रकूट वंश की स्थापना दन्तिदुर्ग ने की थी । इसकी राजधानी मान्यखेट थी । ध्रुव प्रथम राष्ट्रकूट ( दक्षिण भारत ) शासक था , जिसने कन्नौज पर अधिकार के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया ।
• अमोघवर्ष जैन धर्म का अनुयायी था , इसने कन्नड़ में ‘ कविराजमार्ग ' की रचना की ।
• एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मन्दिर का निर्माण कृष्ण प्रथम ने करवाया था ।
• एलोरा एवं एलिफेटा गुहा मन्दिरों का निर्माण राष्ट्रकूट के द्वारा हुआ ।
चोल वंश की स्थापना विजयालय ने की थी ।इसकी राजधानी तंजौर थी ।
• चोल शासक राजराज प्रथम ने श्रीलंका पर आक्रमण करके विजित प्रदेश को चोल साम्राज्य का नया प्रान्त बनाया
• राजाराज प्रथम ने तंजौर में ‘ राजराजेश्वर का शिव मन्दिर ' ( वृहदेश्वर मन्दिर ) बनवाया ।
• राजाराज प्रथम ने शैलेन्द्र शासक को नागपट्टनम में बौद्ध मठ स्थापित करने की अनुमति दी थी ।
• राजेन्द्र प्रथम ने गंगाघाटी के सफल अभियान के क्रम में पाल वंश के शासक महिपाल को पराजित किया ।इस विजय की स्मृति में उसने गंगकोण्डचोलपुरम् ' नगर का निर्माण किया ।
• स्थानीय स्वशासन चोल साम्राज्य की प्रमुख विशेषता थी ।पाल वंश का संस्थापक गोपाल था ।उसने औदन्तपुरी ( बिहार शरीफ ) में मौद्ध विहार की स्थापना की थी ।
धर्मपाल ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया कन्नौज के लिए हुए त्रिपक्षीय संघर्ष की शुरूआत प्रतिहार नरेश वत्सराज ने की थी तथा त्रिपक्षीय संघर्ष का अन्त गुर्जर - प्रतिहारों की अन्तिम विजय । से हुआ था ।
• कश्मीर के काकॉट वंश के शासक ललितादित्य मुक्तापीड ने प्रसिद्ध । । सूर्य मन्दिर ‘ मार्तण्ड ' का निर्माण करवाया । राजतरंगिणी ' का रचयिता कल्हण कश्मीर के लौहार वंश के शासक हर्ष । के दरबार में रहता था ।
. कल्हण ने ' राजतरंगिणी ' की रचना लौहार वंश के अन्तिम शासक जयसिंह के काल में की ।
• उड़ीसा के गंग वंश के शासक नरसिंह प्रथम ने भी कोणार्क में सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया ।
• चन्देल वंश का संस्थापक नन्नुक था । इसकी राजधानी खजुराहो थी खजुराहो के मन्दिरों का निर्माण चन्देलों ने करवाया था ।
परमारों की राजधानी उज्जैन थी , बाद में चलकर धारा उनकी राजधानी बनी ।
परमारर्वशी शासक भोज एक महान कवि था , उसने कविराज की उपाधि धारण की थी ।भोज की कुछ रचनाओं में — ‘ समरांग सूत्रधार ’ , ‘ सरस्वती - कण्ठाभरण ' , ‘ विद्याविनोद ' , ' राजमार्तण्ड ' आदि प्रमुख हैं ।
• भोज ने धार में एक सरस्वती मन्दिर की स्थापना की ।
• चौहान शासक अजयपाल ने अजमेर नगर की स्थापना की ।
• पृथ्वीराज चौहान को ‘ रायपिथौरा ' भी कहा जाता है ।उसके राजकवि ।चन्दबरदाई ने ‘ पृथ्वीराज रासो ' नामक महाकाव्य लिखा ।
• पृथ्वीराज चौहान ने तराईन के प्रथम युद्ध ( 1191 ई . ) में मुहम्मद गोरी को पराजित किया , किन्तु तराईन के द्वितीय युद्ध ( 1192 ई . ) में गोरी से पराजित हो गया ।
• अनंगपाल तोमर ने दिल्ली शहर की नींव डाली थी ।
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• ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में मगुध सर्वाधिक शक्तिशा महाजनपद था ।
• प्राचीन भारत में साम्राज्यवाद की शुरूआत या विकास का श्रेय मगध | दिया जाता है ।
हर्यक वंश ( 544 ई . पू . - 412 ई . पू . )
• मगध साम्राज्य की महत्ता का वास्तविक संस्थापक विम्बिस ( 544 - ई . पू . - 492 ई . पू . ) था । उसकी राजधानी गिरिव्रज ( राजगृह ) थी ।
• बिम्बिसार ने वैवाहिक सम्बन्धों के आधार पर अपनी राजनीतिक स्थिति सुदृढ़ की ।
• बिम्बिसार ने अपने राजकीय चिकित्सक ‘ जीवक ' को पड़ोसी राज्य अवन्ति के शासक चण्डप्रद्योत महासेन की चिकित्सा के लिए भेजा था।
• बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ( 492 ई . पू . - 460 ई . पू . ) ने बन्दै । बनाकर सत्ता पर कब्जा जमाया । अजातशत्रु को कुणिक ' के नाम से भी जाना जाता है ।
• अजातशत्रु ने वज्जि संघ के लिच्छवियों को पराजित करने के लिए । ‘ रथमूसल ' एवं ' महाशिलाकण्टक ' नामक नये हथियारों का प्रयोग किया
अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह के सप्तपणि गुफा में प्रथम बौद । संगीति का आयोजन हुआ था ।
अजातशत्रु का पुत्र उदयिन ( उदयभद्र ) ( 460 ई . पू . - 444 ई . पू . ) हर्यक वंश का तीसरा महत्त्वपूर्ण शासक था , उसने पाटलिपुत्र ( वर्तमान पटना । की स्थापना की तथा उसे अपनी राजधानी बनाया ।
शिशुनाग वंश ( 412 ई . पू . - 344 ई . पू . )
हर्यक वंश के सेनापति शिशुनाग ने मगध की सत्ता पर कब्जा कर ।शिशुनाग वंश की स्थापना की ।
• इस वंश के शासक कालाशोक ( काकवर्ण ) के शासनकाल में मगध की राजधानी वैशाली थी , जहाँ द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ ।
नन्द वंश ( 344 ई . पू . - 324 ई . पू . )
• नन्द वंश का संस्थापक महापद्मनन्द था ।उसे सर्वक्षत्रान्तक अर्थात् ‘ सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला ' कहा गया है ।
• महापद्मनन्द ने एकछत्र राज्य की स्थापना की तथा ‘ एकराट ' की उपाधि धारण की ।
• नन्द वंश का अन्तिम शासक धननन्द था ।इसी के शासनकाल में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था ।सिकन्दर का भारत अभियान
* सिकन्दर मेसीडोनिया ( मकदूनिया ) के क्षत्रप फिलिप का पुत्र था ।
*अपने विश्व विजय की योजना के अन्तर्गत सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया
*झेलम तथा चिनाब के मध्यवर्ती प्रदेश के शासक पौरस ( पुरा ) ने सिकन्दर का ।प्रतिरोध किया ।सिकन्दर एवं पोरस के बीच 326 ई .पू .में झेलम नदी के किनारे भीषण युद्ध हुआ , जिसमें पोरस की हार हुई ।इस युद्ध को ' वितरता का युद्ध ' या ‘ हाइडेस्पीज का युद्ध के नाम से जाना जाता है ।
• बाद में सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी के आगे बढ़ने से इनकार कर दिया अन्ततः सिकन्दर को वापस लौटना पड़ा • वापस लौटते समय 323 ई .पू .में बेबीलोन में सिकन्दर की मृत्यु हो गई ।
मगध साम्राज्य
चन्द्रगुप्त मौर्य ( 322 ई . पू . - 298 ई . पू . ) ने चाणक्य की सहायता से नन्द वंश के शासक धननन्द को अपदस्थ कर मौर्य साम्राज्य के स्थापना की ।
• सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपने राजदृत के रूप में चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा था ।
• सेन्ड्रोकोट्स की पहचान चन्द्रगुप्त के रूप में सर्वप्रथम ' विलियम जोन्स ने की ।
• चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने अन्तिम समय में जैन भिक्षु मुद्रबाहु से देश लेकर श्रवणबेलगोला में कायाक्लेश के द्वारा प्राण त्याग दिया ।
• बिन्दुसार ( 298 ई . पू . - 272 ई . पू . ) को ‘ अमित्रघात ' के नाम से भी जाना जाता है । वह आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था ।
• विन्दुसार ने सीरिया के शासक एण्टियोकस से अंजीर मदिरा तथा एक दार्शनिक की माँग की थी ।
• अशोक ( 278 ई . पू . - 236 ई . ) अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए प्रतिपादित ' धम्म ' के लिए विश्व विख्यात है ।
• अशोक ने अपने शासन के 8वें वर्ष ' ( 261 ई . पू . ) में कलिग पर आक्रमण किया तथा उसे जीत लिया ।
• कलिग के साथ हुए युद्ध में भारी तपात को देख अशोक ने युद्ध नीति को छोड़ ‘ धुम्म नीति ' का पालन किया ।
• अशोक ने अपने बड़े भाई सुमन के पुत्र ‘ निग्रोध से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को अपनाया । बाद में उपगुप्त ने उसे बौद्ध धर्म में दीक्षित किया ।
अशोक के धम्म की परिभाषा ‘ राहलोवादसूत्त ' से ली गई है ।
• अशोक के कलिग युद्ध तथा हृदय परिवर्तन की जानकारी उसके 13वें शिलालेख से मिलती है ।
• अशोक ने अपने शासकीय एवं राजकीय आदेशों को शिलालेखों पर खुदवाकर साम्राज्य के विभिन्न भागों में स्थापित किया ।
• ये शिलालेख ब्राह्मी ’ , ‘ खरोष्ठी , ‘ अरामाईक ' तथा ' ग्रीक ' लिपि में हैं ।
• अशोक के शिलालेखों का पता सर्वप्रथम टी , फैन्थेलर ने लगाया तथा इसे पढ़ने में सर्वप्रथम सफलता जेम्स प्रिंसेप को मिली ।
• मौर्य साम्राज्य में उच्च स्तर के अधिकारियों को तीर्थ ' कहा जाता था , जिनकी संख्या 18 बताई गई है ।
• कौटिल्य ( चाणक्य ) के अर्थशास्त्र ' तथा मेगस्थनीज के इण्डिका ' से मौर्य साम्राज्य के बारे में विशेष जानकारी मिलती है ।
मौर्योत्तर काल में विदेशी आक्रमण
यवन
• मौर्योत्तर काल में भारत पर सबसे पहला विदेशी आक्रमण बैक्ट्रिया के ग्रीकों ने किया । इन्हें ' हिन्द - यवन ' या ' इण्डोग्रीक ' के नाम से भी जाना जाता है ।
* हिन्द - यवन शासकों में मिनाण्डर सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है । उसकी राजधानी साकल थी ।
* प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक नागसेन के साथ मिनाण्डर ( मिलिन्द ) के द्वारा किये गए वाद - विवाद का विस्तृत वर्णन ' मिलिन्दपन्हो ' नामक ग्रन्थ में है ।
* इण्डो - ग्रीक शासकों ने भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के तथा ' लेखयुक्त सिक्के ’ जारी किये ।
* विभिन्न ग्रहों के नाम , नक्षत्रों के आधार पर भविष्य बताने की कला , सम्वत् तथा सप्ताह के सात दिनों का विभाजन यूनानियों ने भारत को सिखलाया ।
शक
• शक मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे ।
• शक शासकों में रुद्रदामन प्रथम प्रमुख था । जूनागढ़ से प्राप्त उसका अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला अभिलेख है ।
• रुद्रदामन प्रथम ने चन्द्रगुप्त मौर्य के समय निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया था ।
पहलव ( पार्थियन )
• पहलव मूलतः पार्थिया के निवासी थे ।
• पहलवों का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक गोन्दोफर्निस था । उसके शासनकाल में ईसाई धर्म - प्रचारक सेण्ट टॉमस भारत आया था ।
कुषाण
• कुषाण यू - ची जनजाति से सम्बन्धित थे । वे पश्चिमी चीन से भारत आये थे ।
• कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था । कनिष्क ने 78 ई . में शक सम्वत् को प्रचलित किया ।
• कनिषक ने पुरुषपुर ( पैशावर ) को अपनी राजधानी बनाया । मथुरा कनिष्क | को द्वितीय राजधानी थी ।
• करमौर में कनिष्क ने कनिष्कपुर नामक नगर की स्थापना की ।
• कनिष्क बौद्ध धर्म का अनुयायी था । उसके शासनकाल में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन कुण्डल वन ( कश्मीर ) में हुआ था ।
गुप्त साम्राज्य
गुप्त वंश का प्रथम महत्त्वपूर्ण शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था , लेकिन इसके पहले श्रीगुप्त ( 240 - 285 ई . ) तथा घटोत्कच ( 280 - 320 ई . ) का शासक के रूप में उल्लेख मिलता है ।
• चन्द्रगुप्त प्रथम ( 319 - 350 ई . ) ने 320 ई . में गुप्त सम्वत् की शुरूआत की । उसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी ।
• चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था , जो उस समय की महत्त्वपूर्ण घटना थी ।
• समुद्रगुप्त ( 350 - 375 ई . ) चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था । विभिन्न अभियानों | के कारण इतिहासकार वी . ए . स्मिथ ने उसे ‘ भारत का नेपोलियन कहा ।
• समुद्रगुप्त की विजयों और उसके बारे में जानकारी के स्रोत उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख है ।
• समुद्रगुप्त की अनुमति से सिंहल ( श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में एक बौद्ध मठ स्थापित किया था । • समुद्रगुप्त के सिक्कों पर उसे वीणा बजाते हुए दिखाया गया है ।
• चन्द्रगुप्त द्वितीय ( 375 - 415 ई . ) का काल गुप्तकाल में साहित्य और कला का स्वर्ण - काल कहा जाता है ।
• चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शकों को पराजित कर ‘ विक्रमादित्य ' की उपाधि धारण की तथा चाँदी सिक्के चलाये
• चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चीनी यात्री फाह्यान ( 399 - 412 ई . ) भारत आया था ।
• उसके दरबार में नौ विद्वानों की मण्डली थी जिसे नवरत्न ' कहा जाता था । इस नवरल में कालिदास अमर सिंह आदि शामिल थे ।
कुमार गुप्त प्रथम ( 415 - 455 ई . ) के समय में नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी ।
• स्कन्दगुप्त ( 455 - 467 ई . ) गुप्त वंश का अन्तिम प्रतापी शासक था । उसने हूणों के आक्रमण को विफल किया था ।
• स्कन्दगुप्त ने भी चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा के समय निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया था ।
• गुप्तकालीन प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ‘ ग्राम ' थी , जिसका प्रशासन ग्रामिक के हाथ में होता था ।
• कई गाँवों को मिलाकर पेठ बनते थे ।
• भारत में मन्दिरों का निर्माण गुप्तकाल से शुरू हुआ । देवगढ़ का । दशावतार मन्दिर गुप्तकाल का सबसे उत्कृष्ट मन्दिर है ।
• गुप्तकालीन बौद्ध गुफा मन्दिरों में अजन्ता एवं बाघ की गुफाएँ प्रमुख हैं ।
• गुप्त शासकों की राजकीय या आधिकारिक भाषा संस्कृत थी ।
• गुप्तकाल में ' भाग ' एवं ' भोग ' राजस्य कर था , ' भाग ' उपज का हिस्सा होता था जबकि भोग सब्जी तथा फलो के रूप में दी जाती थी ।
पुष्यभूति वंश
• पुष्यभूति देश की स्थापना थानेश्वर में हुई थी । इस वंश का पहला महत्त्वपूर्ण शासक प्रभाकरवर्द्धन था ।
• हर्षवर्धन ( G06 - 017 ई . ) इस वंश का महान् शासक था । उसने अपने राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानान्तरित की ।
• बाणभट्ट हर्ष का दरबारी कवि था । उसने ‘ हर्षचरित ' की रचना की । ने स्वयं ' नागानन्द ' , ' रत्नावली ' एवं ' प्रियदर्शिका ' नामक नाटकों को रचना की थी ।
• हर्ष का चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय से नर्मदा नदी तट पर युद्ध हुआ था , जिसमें हर्ष की पराजय हुई थी ।
• हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री हेनसांग भारत आया था । उसका यात्रा - वृत्तांत ' सी - यू - की के नाम से जाना जाता है ।
गुप्तोत्तर वंश
• पल्लव वंश की स्थापना सिंहविष्णु ने की थी । इसकी राजधानी काँची ( काँचीपुरम ) थी ।
• ‘ मत्तविलास प्रहसन ' की रचना पल्लव नरेश महेन्द्र वर्मन ने की ।
• महाबलीपुरम् के रथ मन्दिर का निर्माण पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम के समय हुआ था । उसने वातापीकोड की उपाधि ग्रहण की ।
• राष्ट्रकूट वंश की स्थापना दन्तिदुर्ग ने की थी । इसकी राजधानी मान्यखेट थी । ध्रुव प्रथम राष्ट्रकूट ( दक्षिण भारत ) शासक था , जिसने कन्नौज पर अधिकार के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया ।
• अमोघवर्ष जैन धर्म का अनुयायी था , इसने कन्नड़ में ‘ कविराजमार्ग ' की रचना की ।
• एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मन्दिर का निर्माण कृष्ण प्रथम ने करवाया था ।
• एलोरा एवं एलिफेटा गुहा मन्दिरों का निर्माण राष्ट्रकूट के द्वारा हुआ ।
चोल वंश की स्थापना विजयालय ने की थी ।इसकी राजधानी तंजौर थी ।
• चोल शासक राजराज प्रथम ने श्रीलंका पर आक्रमण करके विजित प्रदेश को चोल साम्राज्य का नया प्रान्त बनाया
• राजाराज प्रथम ने तंजौर में ‘ राजराजेश्वर का शिव मन्दिर ' ( वृहदेश्वर मन्दिर ) बनवाया ।
• राजाराज प्रथम ने शैलेन्द्र शासक को नागपट्टनम में बौद्ध मठ स्थापित करने की अनुमति दी थी ।
• राजेन्द्र प्रथम ने गंगाघाटी के सफल अभियान के क्रम में पाल वंश के शासक महिपाल को पराजित किया ।इस विजय की स्मृति में उसने गंगकोण्डचोलपुरम् ' नगर का निर्माण किया ।
• स्थानीय स्वशासन चोल साम्राज्य की प्रमुख विशेषता थी ।पाल वंश का संस्थापक गोपाल था ।उसने औदन्तपुरी ( बिहार शरीफ ) में मौद्ध विहार की स्थापना की थी ।
धर्मपाल ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया कन्नौज के लिए हुए त्रिपक्षीय संघर्ष की शुरूआत प्रतिहार नरेश वत्सराज ने की थी तथा त्रिपक्षीय संघर्ष का अन्त गुर्जर - प्रतिहारों की अन्तिम विजय । से हुआ था ।
• कश्मीर के काकॉट वंश के शासक ललितादित्य मुक्तापीड ने प्रसिद्ध । । सूर्य मन्दिर ‘ मार्तण्ड ' का निर्माण करवाया । राजतरंगिणी ' का रचयिता कल्हण कश्मीर के लौहार वंश के शासक हर्ष । के दरबार में रहता था ।
. कल्हण ने ' राजतरंगिणी ' की रचना लौहार वंश के अन्तिम शासक जयसिंह के काल में की ।
• उड़ीसा के गंग वंश के शासक नरसिंह प्रथम ने भी कोणार्क में सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया ।
• चन्देल वंश का संस्थापक नन्नुक था । इसकी राजधानी खजुराहो थी खजुराहो के मन्दिरों का निर्माण चन्देलों ने करवाया था ।
परमारों की राजधानी उज्जैन थी , बाद में चलकर धारा उनकी राजधानी बनी ।
परमारर्वशी शासक भोज एक महान कवि था , उसने कविराज की उपाधि धारण की थी ।भोज की कुछ रचनाओं में — ‘ समरांग सूत्रधार ’ , ‘ सरस्वती - कण्ठाभरण ' , ‘ विद्याविनोद ' , ' राजमार्तण्ड ' आदि प्रमुख हैं ।
• भोज ने धार में एक सरस्वती मन्दिर की स्थापना की ।
• चौहान शासक अजयपाल ने अजमेर नगर की स्थापना की ।
• पृथ्वीराज चौहान को ‘ रायपिथौरा ' भी कहा जाता है ।उसके राजकवि ।चन्दबरदाई ने ‘ पृथ्वीराज रासो ' नामक महाकाव्य लिखा ।
• पृथ्वीराज चौहान ने तराईन के प्रथम युद्ध ( 1191 ई . ) में मुहम्मद गोरी को पराजित किया , किन्तु तराईन के द्वितीय युद्ध ( 1192 ई . ) में गोरी से पराजित हो गया ।
• अनंगपाल तोमर ने दिल्ली शहर की नींव डाली थी ।

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Jayda jankari kele comment kare