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History of Hindi Language








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दोस्तों नमस्कार, क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल उठा कि हमारे हिंदुस्तान की भाषा ‘हिंदी' कहां से आई, असल में हिंदी भाषा का इतिहास क्या है? कैसे बनी हमारे देश कि यह राष्ट्रभाषा? शायद आप यह नहीं जानते होंगे। कोई बात नहीं है चलिए आज हम बताते हैं आपको हिंदी भाषा के इतिहास के बारे में। हिंदी नाम हिंदू शब्द से लिया गया था सबसे पहले इस भाषा का प्रयोग उत्तर भारत से किया गया था, जहां आज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड है।
अब हमारी रोज मर्रा की जिन्दगी में हिंदी भाषा का प्रयोग करते है ! और हिंदी हमारे देश की राष्ट्र भाषा है ! ‘सिन्धु’ ‘सिंध’ नदी को कहते है। सिन्धु नदी के आस-पास बसा क्षेत्र सिन्धु प्रदेश कहलाता है। ईरानियों के सम्पर्क में आने से संस्कृत शब्द ‘सिन्धु’ में आकर हिन्दू या हिंद हो गया।

ईरानियों द्वारा उच्चारित किया गए इस हिंद शब्द में ईरानी भाषा का ‘एक’ प्रत्यय लगने से ‘हिन्दी का’ शब्द बना है जिसका अर्थ है ‘हिंद का’। यूनानी शब्द ‘इंडिका’ या अंग्रेजी शब्द ‘इंडिया’ इसी ‘हिन्दीक’ के ही विकसित रूप है।

History of Hindi Language

आज हम जिस भाषा को हिन्दी के रूप में जानते है, वह आधुनिक आर्य भाषाओं में से एक है। आर्य भाषा का प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है, जो साहित्य की परिनिष्ठित भाषा थी। वैदिक भाषा में वेद, संहिता एवं उपनिषदों-वेदांत का सृजन हुआ है। वैदिक भाषा के साथ-साथ ही बोलचाल की भाषा संस्कृत थी,जिसे लौकिक संस्कृत भी कहा जाता है। संस्कृत का विकास उत्तरी भारत में बोली जाने वाली वैदिककालीन भाषाओं से माना जाता है इतिहास के हिसाब से हिंदी भाषा लगभग 2000 साल पुरानी है। हिंदी भाषा की शुरुआत करीबन 1000  ईस्वी में की गई थी, करीबन 1000 ईस्वी से लेकर 1100 ईस्वी के बीच हिंदी भाषा का सिर्फ बोल-चाल का शुरुआत हुआ था। करीब 1500 इस वी तक लोग हिंदी भाषा अच्छी तरह से और साफ तरह से बोल लेते थे। 1460 इस वी के करीब साहित्य सर्जन भी होता था। अब साहित्य सर्जन क्या होता है? यानी की  दोहा,चौपाई ,गाथा, छंद ये सभी साहित्य सर्जन में होते हैं।
हिंदी भारतीय गणराज की राजकीय और मध्य भारतीय- आर्य भाषा है। सन 2001 की जनगणना के अनुसार, लगभग 25.79 करोड़ भारतीय हिंदी का उपयोग मातृभाषा के रूप में करते हैं, जबकि लगभग 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक इस्तेमाल करते हैं। सन् 1998 के पूर्व, मातृभाषियों की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं के जो आँकड़े मिलते थे, उनमें हिन्दी को तीसरा स्थान दिया जाता था।

1. भारतीय संविधान ने 14 सितंबर 1949 में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला था. दिया. इसलिए हर साल हम 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं.

2. बिहार वो पहला राज्य था जिसने 1881 में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में चुना था।

3. 2015 में एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में जो भाषा सबसे ज्यादा बोली जाती है वो 'हिन्दी' है।

4. हिन्दी दिवस 14 सितंबर और विश्वे हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है. सबसे पहले इसकी शुरुआत नागपुर से 1975 में हुई थी। वर्ष 2006 में इसे आधिकारिक दर्जा और विश्वभर में पहचान मिली.

5. हालांकि हिन्दी भारत की भाषा है लेकिन ये भारत के अलावा और भी कई देशों में बोली जाती है. जैसे- मॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, टोबेगो और नेपाल.

6. हिन्दी भाषा की सबसे रोचक बात ये है की हिन्दी शब्दों को जैसे बोला जाता है वैसे ही लिखा भी जाता है. इसलिए और भाषाओं की तुलना में इस भाषा को सीखना बहुत आसान है.

7. भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है. हमारे देश के 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं. हिंदी उनके कामकाज का भी हिस्सां है.

8. जंगल, कर्मा, योगा, बंगला, चीता, लूटपाट, ठग और अवतार आदि कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका अँग्रेजी में भी प्रयोग किया जाता है। ये सभी शब्द हिन्दी भाषा से ही लिए गए हैं।

9. हिंदी का नमस्तेप शब्दज ऐसा शब्दद है जिसको सबसे ज्यादा बार बोला जाता है. एक अनुमान के मुताबिक हर पांच में से एक व्य क्ति हिंदी में इंटरनेट का उपयोग करता है.
10.सबसे पहले हिंदी में कविता लिखने वाले शख्स थे प्रख्यात कवि ‘अमीर खुसरो’।

11.हिंदी में सबसे पहली पुस्तक “टप्रेम सागर” 1805 में प्रकशित हुई थी जिसे लल्लू लाल ने लिखी थी।

12. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा की हिन्दी भाषा के इतिहास पर पहले साहित्य की रचना करने वाला शख्स कोई हिन्दू नहीं बल्कि एक फ्रांसीसी लेखक था जिसका नाम है ग्रासिन द तैसी।


13.गूगल ने कहा है कि इंटरनेट पर हिंदी कंटेंट की मांग अब बढ़ना शुरू हो गई है. यह साल-दर-साल English कंटेंट के 19 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले 94 प्रतिशत बढ़ती जा रही है.

14.पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा भाषाएँ बोली जाती हैं. विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का देश भारत सिर्फ एक या दो भाषाओं का नहीं बल्कि 461 भाषाओं का घर है पर इनमें से 14 विलुप्त हो गईं है.

15,हिंदी भाषा सबसे सरल और लचीली है. हिन्दी बोलने एवं समझने वाले लोग पचास करोड़ से भी अधिक है.

16.सन् 2000 में हिंदी का पहला Webportal अस्तित्त्व में आया था. तभी से इंटरनेट पर हिंदी ने अपनी छाप छोड़नी प्रारंभ कर दी जो अब रफ्तार पकड़ चुकी है.

17.कम्प्यूटर के विकास के आरम्भिक काल में अंग्रेजी को छोड़कर विश्व की अन्य भाषाओं का प्रयोग बहुत कम किया जाता था. जिससे कारण सामान्य लोगों में यह गलत धारणा फैल गयी कि कम्प्यूटर अंग्रेजी के सिवा किसी दूसरी भाषा में काम ही नही कर सकता. किन्तु यूनिकोड के पदार्पण के बाद स्थिति बहुत तेजी से बदल गयी. 19 अगस्त 2009 में गूगल ने कहा की हर 5 वर्षों में हिन्दी की सामग्री में 94% बढ़ोतरी हो रही है.

18.आज भी संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के 45 विश्वविद्यालयसहित पूरी दुनिया के लगभग 176 विश्वविद्यालयों में हिन्दीकी पढ़ाई जारी है.

19.विदेशों में 25 से अधिक पत्र-पत्रिकाएं है जो नियमित रूप से हिंदी में प्रकाशित हो रही हैं.

21.हिंदी भारत की उन 7 भाषाओं में से एक भाषा है जिसका इस्तेमाल Web addresses (URLs) बनाने के लिए किया जाता है.



संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद है। ऋग्वेद से पहले भी सम्भव है कोई भाषा विद्यमान रही होगी, परन्तु आज तक उसका कोई लिखित रूप नहीं प्राप्त हो पाया। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि सम्भवतः आर्यों की सबसे प्राचीन भाषा ऋग्वेद की ही भाषा, वैदिक संस्कृत ही थी। विद्वानों का मत है, कि ऋग्वेद की भी एक काल अथवा एक स्थान पर रचना नहीं हुई। इसके कुछ मन्त्रों की रचना कन्धार में, कुछ की सिन्धु तट पर, कुछ की विपाशा-शतद्रु के संभेद (हरि के पत्तन) पर और कुछ मन्त्रों की यमुना गंगा के तट पर हुई। इस अनुमान का आधार यह है कि इन मन्त्रों में कहीं कन्धार के राजा दिवोदास का वर्णन है, तो कहीं सिन्धु नरेश सुदास का। इन दोनों राजाओं के शासन काल के बीच शताब्दियों का अन्तर है। इससे यह अनुमान लगाया जाता है, कि ऋग्वेद की रचना सैकड़ों वर्षों में जाकर पूर्ण हुई और बाद में इसे संहित-(संग्रह)-बद्ध किया गया।

ऋग्वेद के उपरान्त ब्राह्मण ग्रन्थों तथा सूत्र ग्रन्थों का सृजन हुआ और इनकी भाषा ऋग्वेद की भाषा से कई अंशों में भिन्न लौकिक या क्लासिकल संस्कृत है। सूत्र ग्रन्थों के रचना काल में भाषा का साहित्यिक रूप व्याकरण के नियमों में आबद्ध हो गया था। तब यह भाषा संस्कृत कहलायी। तब छन्दस् वेद तथा लोक-भाषा (लौकिक) में पर्याप्त अन्तर स्पष्ट रूप में प्रकट हुआ। हम ऐसा कह सकते है कि हिन्दी की उत्पति संस्कृत भाषा से हुई। या ये भी कहे सकते है कि संस्कृत, हिन्दी की जननी है।

दोस्तों अगर आपको एक आर्टिकल पसंद आया हो तो नीचे कमेंट करें और व्हाट्सएप फेसबुक पर शेयर करें नमस्कार दोस्तों अगले आर्टिकल  के लिए फिर से प्रस्तुत होंगे ।

आप सभी का दिल से धन्यवाद
जय हिन्द वन्दे मातरम्

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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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