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दुर्गा मां के नौ रुप





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इस साल 2019 में यह गुप्त नवरात्री 6 अप्रैल से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि 14 अप्रैल को राम नवमी के त्योहार के साथ सम्पन्न होंगे। .
दुर्गा मां के नौ दिनों को देश भर में अपने अपने अंदाज से मनाया जाता है। कहीं इस अवसर पर देवी के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए कई तरह के नृत्य पेश किए जाते हैं
नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र,आषाढ,अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।
नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।
हिंदू मान्यतानुसार देवी दुर्गा को शक्ति का अवतार माना जाता है। दुर्गा जी हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके नौ अन्य रूप है जिनकी पूजा नवरात्रों में की जाती है। माना जाता है कि राक्षसों का संहार करने के लिए देवी पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया था। दुर्गा जी को तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले साधक आदि शक्ति और परमदेवी मानते हैं। दुर्गा जी के विषय में हिन्दू धर्म में कई कथाओं का वर्णन है.

मैं आप को एक कहानी सुनाता हूं जो नवरात्रि से सम्बंधित है
एक नगर में एक ब्राह्माण रहता था। वह मां दुर्गा का परम भक्त था। उसकी एक कन्या थी, जिसका नाम गौरी था। वह ब्राह्मण रोजाना पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करता था। गौरी भी प्रतिदिन इस पूजा में भाग लिया करती थी। एक दिन गौरी खेलने चली गई और मां दुर्गा की पूजा में शामिल नहीं हो सकी। यह देख पिता को गुस्सा आ गया औरक्रोधवश उसके पिता ने कहा कि वह उसका विवाह किसी दरिद्र और कोढ़ी से करेगा। पिता की बात सुनकर गौरी दुखी हो गई। अपनी बात के अनुसार ब्राह्माण ने अपनी कन्या का विवाह एक कोढ़ी के साथ कर दिया। गौरी अपने पति के साथ विवाह कर चली गई। जहां उसे पति के घर जाकर बहुत दुखी होना पड़ा। वह पति का घर न होने के कारण उसे वन में घास के आसन पर रात बड़े कष्ट में बितानी पड़ी। गौरी की इस दशा को देख माता भगवती उसके सामने प्रकट हुईं और गौरी से बोलीं ‘हे कन्या मैं तुम पर प्रसन्न हूं’ मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूं, मांगों क्या मांगती हों। इस पर गौरी ने पूछा आप मुझ पर क्यों प्रसन्न हो। इसके बाद देवी ने बताया- मैं तुम पर पूर्व जन्म के तुम्हारे पुण्य के प्रभाव से प्रसन्न हूं, तुम पूर्व जन्म में भील की पतिव्रता स्त्री थी। एक दिन तुम्हारे पति भील द्वारा चोरी करने के कारण तुम दोनों को सिपाहियों ने पकड़ कर जेलखाने में कैद कर दिया था। उन लोगों ने तुम्हें और तुम्हारे पति को भोजन भी नहीं दिया था। इस प्रकार नवरात्र के दिनों में तुमने न तो कुछ खाया और न ही जल पिया इसलिए नौ दिन तक नवरात्र व्रत का फल तुम्हें प्राप्त हुआ। इसलिए उस व्रत के प्रभाव के कारण मैं तुम्हें नोवांछित वरदान दे रही हूं। इसके बाद कन्या ने पति का कोढ़ दूर करने का वचन मांगा। जिसके बाद माता ने कन्या की यह इच्छा शीघ्र पूरी कर दी। उसके पति का शरीर माता भगवती की कृपा से रोगहीन अर्थात रोगमुक्त  हो गया। दोस्तों आसी सी थी मां दुर्गा ।

दुर्गा जी के नव रूप है जो इस प्रकार हैं।
नौ देवियाँ है :- जो इस प्रकार हैं।


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मां-दुर्गा-का-नौवां-रूप




1.शैलपुत्री - इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
2.ब्रह्मचारिणी - इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
3.चंद्रघंटा - इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली। 4.नवरात्री – इसे बसंत नवरात्री भी कहते है.
5.कूष्माण्डा - इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
6.स्कंदमाता - इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
7.कात्यायनी - इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
8.कालरात्रि - इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
9..महागौरी - इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।

पहला दिन

प्रतापदा जो नवरात्रि का पहला दिन है इस दिन जब दुर्गा के पहले अवतार, शैलपुत्री की पूजा की जाती है जिसे पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। माँ के इस रूप का वाहन बैल है।

2. ब्रह्मचारिणी

माँ दुर्गा का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी जिसकी पूजा दूसरे दिन की जाती है। इसमें ब्रह्म शब्द का अर्थ संस्कृत में तपस्या होता है। जानकारी के लिए बता दें कि माँ के इस रूप में आपको अनेकों चित्र मिलेंगे जिसमें दाएं हाथ में जप की माला नजर आएगी।

3. चंद्रघंटा

नवरात्रि के इस पावन पर्व पर तीसरा दिन होता है माँ के चंद्रघंटा नाम। इस दिन इनकी पूजा की जाती है। बता दें कि इस रूप में माँ की दस भुजाएं है। साथ ही माथे पर आधा चंद्रमा भी है।

4.  कूष्माण्डा

कूष्माण्डा जो कि माँ दुर्गा का चौथा अवतार है और इनकी पूजा चौथे दिन की जाती है। अगर हम इनके रूप की बात करें तो इस स्वरूप को सृष्टि का जनक भी माना जाता है। साथ ही इसमें माँ की आठ भुजाएं है।

5. स्कंदमाता

पौराणिक कथाओं के अनुसार अत्याचारी दानवों से रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर माँ दुर्गा ने ‘स्कंदमाता’ का रूप धारण किया था। यह इनका पांचवां रूप है।

6. कात्यायिनी

इसी बीच माँ दुर्गा का छठा रूप कात्यायिनी है। इनका नाम इस कारण कात्यायिनी है क्योंकि इन्होंने कात्यान ऋषि के घर जन्म लिया था। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से शत्रु का विनाश होता है और कुंवारी कन्याओं का विवाह होता है।

7. कालरात्रि

माता दुर्गा का सातवाँ विशाल रूप कालरात्रि है। बता दें कि इस रूप में इनका पूरा शरीर काले रंग का है तथा पूरे बाल बिखरे तथा वाहन गधा है। माँ दुर्गा का यह रूप।सबसे भयानक है।

8. महागौरी

वहीं अगर हम आठवें रूप की अगर बात करें तो माँ दुर्गा का आठवाँ रूप महागौरी है। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि शंकर भगवान के लिए कठोर तप करने के कारण इनका शरीर काला हो गया था। जिसे शिव भगवान ने प्रसन्न होकर गंगा जल से धोया था। इस कारण इनका शरीर गौर वर्ण का हो गया था और इसी कारण इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। इस दिन महिलायें अपने पतियों के लिए लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है।

9. सिद्धिदात्री

माँ दुर्गा का नौवां और अंतिम रूप सिद्धिदात्री का रूप है। कहा जाता है कि इन सभी सिद्धियों की प्राप्ति के कारण शंकर भगवान का आधा शरीर नारी का है।

तो इस प्रकार थी नव माता का अर्थ अब आगे बढ़ते हैं
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में आती है. इस नवरात्री के साथ हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुवात होती है. यह मार्च अप्रैल के समय आती है. इस नवरात्री के नौवें दिन, रामनवमी का त्यौहार मनाया जाता है. इस लिए इसे राम नवरात्री नाम से भी जाना जाता है. जो रीती, पूजा शरद नवरात्री में होती है, वो इस नवरात्री में भी होती है. यह नवरात्री उत्तरी भारत में बहुत प्रसिद्ध है. महाराष्ट्र में गुडी पड़वा एवं आंध्रप्रदेश में उगडी के साथ शुरू होती है.
माघ नवरात्री – यह गुप्त नवरात्री माघ महीने मतलब जनवरी-फ़रवरी महीने के समय आती है. यह नवरात्री बहुत कम स्थानों में जानी जाती है, उत्तरी भारत के कुछ इलाके जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड में इसे मनाते है. इस साल 2019 में यह गुप्त नवरात्री 5 फरवरी 2019 से शुरू हो कर 19 फरवरी 2019 तक चलेगी. 5 फरवरी को घट स्थापना का दिन है.
अषाढ़ नवरात्री – यह असाढ़ महीने में आती है, यह भी गुप्त नवरात्री है, जो जून-जुलाई में आती है. इसे गायत्री या शाकम्भरी नवरात्री भी कहते है.
पौष नवरात्री – यह पौष महीने में आने वाली नवरात्री है, जो दिसम्बर-जनवरी के महीने में आती है.
वैसे इन सभी नवरात्रि मे जो आश्विन मास की नवरात्रि आती है, केवल उसी समय माँ दुर्गा की मूर्ति पूजा का महत्व ज्यादा है.



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संग्रहश्री-नवदुर्गा


असुरों के नाश का पर्व नवरात्रि, नवरात्र मनाने के पीछे बहुत-सी रोचक कथाएं प्रचलित हैं।
कहा जाता है कि दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहने पर दैत्यों ने घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वर मांगा कि उन्हें कोई पुरुष, जानवर और उनके शस्त्र न मार सकें।
वरदान मिलते ही असुर अत्याचार करने लगे, तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्माजी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री शक्ति ही कर सकती है। ब्रह्माजी के निर्देश पर देवों ने 9 दिनों तक मां पार्वती को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया। असुरों के संहार के लिए देवी ने रौद्र रूप धारण किया था इसीलिए शारदीय नवरात्र शक्ति-पर्व के रूप में मनाया जाता है।लगभग इसी तरह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक देवी के आह्वान पर असुरों के संहार के लिए माता पार्वती ने अपने अंश से 9 रूप उत्पन्न किए। सभी देवताओं ने उन्हें अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। इसके बाद देवी ने असुरों का अंत किया। यह संपूर्ण घटनाक्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक घटित हुआ इसलिए चैत्र नवरात्र मनाए जाते हैं।

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Milan Tomic

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