इन सफल व्यक्तित्व से सीखें
विश्वनाथन आनन्द
जब कभी मैं हारा या अपने प्रदर्शन से असन्तुष्ट आ तो निराश होने के बजाय मैंने इसे अपनी । सीखने की यूवता में महत्वपूर्ण स्थान दिया है । जन में लोगों के असफल होने का एक बड़ा और महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि वे अधिकतर ठीक तरह से समझ नहीं पाते कि असल में वे कौन हैं और अपने जीवन में क्या बनना चाहते हैं । वे असे लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं कर पढे । स्वयं को जानो ग्रीस के मुहान दार्शनिक सुकरात हने इस कथन में विश्वास रखते थे । मेरे विचार से सीनियर सैकेण्डरी यानि कि सोलह - सत्रह वर्ष की उम्र तक आते - आते आपको इस बात का ठीक - ठाक अनुमान हो जाता है कि आप किस ओर बढ़ना चाहते हैं । यदि आप अपने बारे में और अपने काम के बारे में इससे पहले किसी निर्णय पर पहुंच चुके हैं तो और भी अच्छा है । लेकिन मेरे हिसाय से अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और लक्ष्य को पहचानने का सही समय तब होता है , जब आप स्कूली शिक्षा पूरी करने के कुद अपने जीवन की सबसे कठिन यात्रा सही कैरियर चुनने की ओर बढ़ते हैं ।
यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने लिए क्या भविष्य चाहते हैं । कोशिश यह आपका और सिर्फ आपका निर्णय हो । इस पर सोचने में समय बिताएँ कि असल में क्या करना चाहते हैं । जॉचिए कि आप में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के या फिर इस तक पहुँचने के लिए किस विशेषता को विकसित करने की क्षमता कोशिश करें कि परिवार और साथ के लोग आपके इस निर्णय में दबाव न बनाएँ । बहत से युवाओं को असफलता की ओर जाते देखा है , सिर्फ इसलिए कि वे किसी के सपने को पूरा करने के लिए मेहनत में जुटे थे । परिवार और दोस्त अच्छे सलाह और गुरू हो सकते हैं , लेकिन जब कैरियर तय करने का सवाल हो तो खुद सोच विचार करें । आखिर आपको आपसे बेहतर कौन जानता है ? सबसे महत्वपूर्ण पाठ जो मैंने सीखा , वह है कि आप जो भी कर रहे हैं , उसे लेकर आनन्द और उत्साह महसूस करना जरूरी है न कि उससे ग्रस्त होना चाहिए । जब आप किसी चीज को आनन्दपूर्ण पाते हैं तो हमेशा उससे सीखना जारी रखते हैं और कभी उससे थकते नहीं । मैंने हमेशा देखा है कि जो युवा अपने दिल के अनुसार चलते हैं वे अधिकतर उन लोगों से ज्यादा सफल होते हैं जिन पर विचार लादे जाते हैं । मामला प्रदर्शन बनाम झुकाव का भी है । आपको लग सकता है कि आप विज्ञान के विषयों में बेहतरीन हैं और मेडिकल क्षेत्र में कैरियर के लिए मुकम्मल हैं । लेकिन आपका दिल फोटोग्राफी में श्रेष्ठ होना चाहता है । ऐसी स्थिति में , मैं आपको फोटोग्राफी चुनने की सलाह दूंगा और कहूँगा कि इस क्षेत्र में प्रवीण होने के लिए आवश्यक साधन उपकरणों के साथ प्रवेश करें । इसलिए एक बार यदि आपको उस क्षितिज का अन्दाज हो जाए जिसे आप पाना चाहते हैं तो सही रास्ते पर चलने के लिए विभिन्न विकल्पों में से उसे चुनें । खिलाड़ियों के लिए वे लोग जो क्रिकेट खिलाड़ी , बैडमिन्टन या टेनिस सितारे , टेबिल टेनिस चैम्पियन , तैराक या फिर शतरंज के लिए खुद को बेहतर पाते हैं , वे जितना जल्दी हो । सके अपनी विशेषता को पहचाने । लगभग उस समय से जब पहली बार उन्होंने खेल में आनन्द महसूस किया था । मैं सात वर्ष का था जब पहली बार महत्त्वपूर्ण शतरंज टूनमिन्ट खेलना शुरू किया था । पार्थिव पटेल पन्द्रह वर्ष का था जब उसने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट टीम प्रतिनिधित्व किया । इसी तरह सात वर्षीय विराट बाधवर अन्तर्राष्ट्रीय । गोल्फ में प्रसिद्धि हासिल कर रहा है । शतरंज में भी कोने हम्पी जैसे नाम से जिन्होंने बहुत कम उम्र में ग्राण्ड मास्टर का खिताब जीता है ।
संघर्ष का दूसरा अवसर । मैने हमे असफलता को महत्वपूर्ण माना है , क्योंकि यह मुझे सफलता । । तर कराती है । इससे मेरी उपसशियों और मीठी व उन्हें हासिल करने के लिए की गई । मेहनत और अधिक गागर दिखाई देती है । असफलता असल में आपको पता दसरा मेरा है , इसलिए कभी भी इसे घबराए हैं । ऐसे बहुत से लोग हैं जिक असफलता उनके लिए किसी महत्वपूर्ण रचनात्मक काम की शुरुआत सिद्ध हुई है । निराश होने के बजाय असफलता की सीखने का प्रयास ! एमा प्रयास जो कि आपके द्वारा बार - बार दोहराई गलतियों को दर्शाए । में ऐसा ही करी । जव की । हरा , या अपने प्रदर्शन से असन्तुष्ट हुआ तो निराश होने के बजाय । इसे अपनी सीखने की श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिया है । मेरे लिए असफलता अप का विश्लेषण करने के लिए और उन क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए नहीं कि अतिरिक्त महंत की जरूरत है , एक अवसर है । उन सभी को , जो इस समय असफलता के दौर को अनुभव कर रहे हो , मेरी सलाह हैं । कि वे अपने आपको दूसरा मौका दे संघर्ष का दूसरा अवसर । यह भी जरूरी है कि खुद को जरूरत से ज्यादा आलोचनात्मक होकर न देखें । अपने मजबूत बिन्दुओं का विश्लेषण करें और कमजोरियों पर जरूरत से ज्यादा जोर देने से बचें । मैं जब कभी कोई खेल हार जाता हूँ तो खुद से कहता हूँ ‘ में नीचे हो सकता है , लेकिन बाहर नहीं । ' याद रखें , बड़ी - से - बड़ी असफलता समय के बीतने के साथ ' मर जाती है । जिस तरह शतरंज में , उसी तरह जीवन में भी एक गलत चाल का मतलब खेल का अन्त नहीं ।
आत्मसन्तुष्टि यानि सीढ़ी उतरना सफलता से सम्बन्धित एक बड़ा खतरा जो अक्सर लगातार प्राप्त सफलता के आता है , वह है आत्मसन्तुष्टि का भाव । जब चीजें सही चल रही हो तो उसे होता है सफलता के आभामण्डल में आराम से बैठ जाना । जबकि मूलमन्त्र है कि भी चीज को अपनी धरोहर नहीं मानना चाहिए , चाहे वह सफलता ही क्यों न यदि एक शतरंज खिलाड़ी अपने आप से खुश होकर कहता है " अहा ! मैं दुनियाभर के तीसरे स्थान का खिलाड़ी हैं । इसका मतलब वह नीचे उतरने की राह पर है । - सबके लिए मेरी सलाह है कि सफलता को अपनी धरोहर न समझे । । जरूरत से ज्यादा विश्वास भी नुकसानदायक है और इसके कारण कई बार फिसल भी सकता है । यदि आप शिखर पर रहने के आदी हो गए हैं तो याद रखिए इसके आगे दूसरा कोई रास्ता नहीं सिवाय नीचे आने के , इसलिए अपने स्थान को बनाए रखने के लिए मेहनत बरकरार रखें । यदि आप स्कूल में सर्वश्रेष्ठ हैं तो पीछे मुड़कर उन विद्यार्थियों पर नजर रखें जो आप तक पहुँचने के लिए मेहनत कर रहे हैं । यदि आप अपनी नौकरी / व्यवसाय में अच्छा कर रहे हैं तो हमेशा खुद को और बेहतर बनाते हुए , सीखते हुए , सीखने की प्रक्रिया जारी रखें । अपनी समस्याओं को लेकर आराम करना स्पष्ट तौर पर हानिकारक है । विजय प्राप्ति के बाद काम की गति धीमी कर देना , मेहनत में ढील करना या फिर काम के दबाव को कम महसूस करना , नीचे की ओर जाने की शुरुआत हो सकती है जिससे वापस लौटना मुश्किल हो सकता है । इसलिए अपने दिमाग से आत्मसन्तुष्टि का भाव हटाकर लगातार आगे की ओर बढ़ते रहने पर प्रतिबद्ध रहें । अपने काम से सन्तुष्ट हो जाने से आप खुद को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन के अवसर से वंचित रह सकते हैं । याद रखें | आत्मसन्तुष्टि नए विचार और परिवर्तन को नष्ट करती है ।
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विश्वनाथन आनन्द
जब कभी मैं हारा या अपने प्रदर्शन से असन्तुष्ट आ तो निराश होने के बजाय मैंने इसे अपनी । सीखने की यूवता में महत्वपूर्ण स्थान दिया है । जन में लोगों के असफल होने का एक बड़ा और महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि वे अधिकतर ठीक तरह से समझ नहीं पाते कि असल में वे कौन हैं और अपने जीवन में क्या बनना चाहते हैं । वे असे लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं कर पढे । स्वयं को जानो ग्रीस के मुहान दार्शनिक सुकरात हने इस कथन में विश्वास रखते थे । मेरे विचार से सीनियर सैकेण्डरी यानि कि सोलह - सत्रह वर्ष की उम्र तक आते - आते आपको इस बात का ठीक - ठाक अनुमान हो जाता है कि आप किस ओर बढ़ना चाहते हैं । यदि आप अपने बारे में और अपने काम के बारे में इससे पहले किसी निर्णय पर पहुंच चुके हैं तो और भी अच्छा है । लेकिन मेरे हिसाय से अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और लक्ष्य को पहचानने का सही समय तब होता है , जब आप स्कूली शिक्षा पूरी करने के कुद अपने जीवन की सबसे कठिन यात्रा सही कैरियर चुनने की ओर बढ़ते हैं ।
यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने लिए क्या भविष्य चाहते हैं । कोशिश यह आपका और सिर्फ आपका निर्णय हो । इस पर सोचने में समय बिताएँ कि असल में क्या करना चाहते हैं । जॉचिए कि आप में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के या फिर इस तक पहुँचने के लिए किस विशेषता को विकसित करने की क्षमता कोशिश करें कि परिवार और साथ के लोग आपके इस निर्णय में दबाव न बनाएँ । बहत से युवाओं को असफलता की ओर जाते देखा है , सिर्फ इसलिए कि वे किसी के सपने को पूरा करने के लिए मेहनत में जुटे थे । परिवार और दोस्त अच्छे सलाह और गुरू हो सकते हैं , लेकिन जब कैरियर तय करने का सवाल हो तो खुद सोच विचार करें । आखिर आपको आपसे बेहतर कौन जानता है ? सबसे महत्वपूर्ण पाठ जो मैंने सीखा , वह है कि आप जो भी कर रहे हैं , उसे लेकर आनन्द और उत्साह महसूस करना जरूरी है न कि उससे ग्रस्त होना चाहिए । जब आप किसी चीज को आनन्दपूर्ण पाते हैं तो हमेशा उससे सीखना जारी रखते हैं और कभी उससे थकते नहीं । मैंने हमेशा देखा है कि जो युवा अपने दिल के अनुसार चलते हैं वे अधिकतर उन लोगों से ज्यादा सफल होते हैं जिन पर विचार लादे जाते हैं । मामला प्रदर्शन बनाम झुकाव का भी है । आपको लग सकता है कि आप विज्ञान के विषयों में बेहतरीन हैं और मेडिकल क्षेत्र में कैरियर के लिए मुकम्मल हैं । लेकिन आपका दिल फोटोग्राफी में श्रेष्ठ होना चाहता है । ऐसी स्थिति में , मैं आपको फोटोग्राफी चुनने की सलाह दूंगा और कहूँगा कि इस क्षेत्र में प्रवीण होने के लिए आवश्यक साधन उपकरणों के साथ प्रवेश करें । इसलिए एक बार यदि आपको उस क्षितिज का अन्दाज हो जाए जिसे आप पाना चाहते हैं तो सही रास्ते पर चलने के लिए विभिन्न विकल्पों में से उसे चुनें । खिलाड़ियों के लिए वे लोग जो क्रिकेट खिलाड़ी , बैडमिन्टन या टेनिस सितारे , टेबिल टेनिस चैम्पियन , तैराक या फिर शतरंज के लिए खुद को बेहतर पाते हैं , वे जितना जल्दी हो । सके अपनी विशेषता को पहचाने । लगभग उस समय से जब पहली बार उन्होंने खेल में आनन्द महसूस किया था । मैं सात वर्ष का था जब पहली बार महत्त्वपूर्ण शतरंज टूनमिन्ट खेलना शुरू किया था । पार्थिव पटेल पन्द्रह वर्ष का था जब उसने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट टीम प्रतिनिधित्व किया । इसी तरह सात वर्षीय विराट बाधवर अन्तर्राष्ट्रीय । गोल्फ में प्रसिद्धि हासिल कर रहा है । शतरंज में भी कोने हम्पी जैसे नाम से जिन्होंने बहुत कम उम्र में ग्राण्ड मास्टर का खिताब जीता है ।
संघर्ष का दूसरा अवसर । मैने हमे असफलता को महत्वपूर्ण माना है , क्योंकि यह मुझे सफलता । । तर कराती है । इससे मेरी उपसशियों और मीठी व उन्हें हासिल करने के लिए की गई । मेहनत और अधिक गागर दिखाई देती है । असफलता असल में आपको पता दसरा मेरा है , इसलिए कभी भी इसे घबराए हैं । ऐसे बहुत से लोग हैं जिक असफलता उनके लिए किसी महत्वपूर्ण रचनात्मक काम की शुरुआत सिद्ध हुई है । निराश होने के बजाय असफलता की सीखने का प्रयास ! एमा प्रयास जो कि आपके द्वारा बार - बार दोहराई गलतियों को दर्शाए । में ऐसा ही करी । जव की । हरा , या अपने प्रदर्शन से असन्तुष्ट हुआ तो निराश होने के बजाय । इसे अपनी सीखने की श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिया है । मेरे लिए असफलता अप का विश्लेषण करने के लिए और उन क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए नहीं कि अतिरिक्त महंत की जरूरत है , एक अवसर है । उन सभी को , जो इस समय असफलता के दौर को अनुभव कर रहे हो , मेरी सलाह हैं । कि वे अपने आपको दूसरा मौका दे संघर्ष का दूसरा अवसर । यह भी जरूरी है कि खुद को जरूरत से ज्यादा आलोचनात्मक होकर न देखें । अपने मजबूत बिन्दुओं का विश्लेषण करें और कमजोरियों पर जरूरत से ज्यादा जोर देने से बचें । मैं जब कभी कोई खेल हार जाता हूँ तो खुद से कहता हूँ ‘ में नीचे हो सकता है , लेकिन बाहर नहीं । ' याद रखें , बड़ी - से - बड़ी असफलता समय के बीतने के साथ ' मर जाती है । जिस तरह शतरंज में , उसी तरह जीवन में भी एक गलत चाल का मतलब खेल का अन्त नहीं ।
आत्मसन्तुष्टि यानि सीढ़ी उतरना सफलता से सम्बन्धित एक बड़ा खतरा जो अक्सर लगातार प्राप्त सफलता के आता है , वह है आत्मसन्तुष्टि का भाव । जब चीजें सही चल रही हो तो उसे होता है सफलता के आभामण्डल में आराम से बैठ जाना । जबकि मूलमन्त्र है कि भी चीज को अपनी धरोहर नहीं मानना चाहिए , चाहे वह सफलता ही क्यों न यदि एक शतरंज खिलाड़ी अपने आप से खुश होकर कहता है " अहा ! मैं दुनियाभर के तीसरे स्थान का खिलाड़ी हैं । इसका मतलब वह नीचे उतरने की राह पर है । - सबके लिए मेरी सलाह है कि सफलता को अपनी धरोहर न समझे । । जरूरत से ज्यादा विश्वास भी नुकसानदायक है और इसके कारण कई बार फिसल भी सकता है । यदि आप शिखर पर रहने के आदी हो गए हैं तो याद रखिए इसके आगे दूसरा कोई रास्ता नहीं सिवाय नीचे आने के , इसलिए अपने स्थान को बनाए रखने के लिए मेहनत बरकरार रखें । यदि आप स्कूल में सर्वश्रेष्ठ हैं तो पीछे मुड़कर उन विद्यार्थियों पर नजर रखें जो आप तक पहुँचने के लिए मेहनत कर रहे हैं । यदि आप अपनी नौकरी / व्यवसाय में अच्छा कर रहे हैं तो हमेशा खुद को और बेहतर बनाते हुए , सीखते हुए , सीखने की प्रक्रिया जारी रखें । अपनी समस्याओं को लेकर आराम करना स्पष्ट तौर पर हानिकारक है । विजय प्राप्ति के बाद काम की गति धीमी कर देना , मेहनत में ढील करना या फिर काम के दबाव को कम महसूस करना , नीचे की ओर जाने की शुरुआत हो सकती है जिससे वापस लौटना मुश्किल हो सकता है । इसलिए अपने दिमाग से आत्मसन्तुष्टि का भाव हटाकर लगातार आगे की ओर बढ़ते रहने पर प्रतिबद्ध रहें । अपने काम से सन्तुष्ट हो जाने से आप खुद को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन के अवसर से वंचित रह सकते हैं । याद रखें | आत्मसन्तुष्टि नए विचार और परिवर्तन को नष्ट करती है ।

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Jayda jankari kele comment kare