सोच की नई उड़ान
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| नई-सोच-नई-उड़ान |
आपने ओलंपिक गेम्स के बारे में तो बहतं कुछ सुना । मेरी कॉम साइना नेहवाल मनिका बत्रा साक्षी मलिक विनेश फोगाट नीरज चोपड़ा , बजरंग पुनिया , हिना सिद्ध जैसे ओलंपियंस को बखूबी जानते लेकिन क्या आपने लय जैन घवन गोयल , सिद्धार्थ तिवारी , भास्कर गुप्ता या निशांत अभ । । का नाम दरअसल ये सभी 2018 में हर इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड के स्वर्ण पदक विजेता हैं । ऐसा करके इन्होंने एक नया इतिहास रचा पुर्तगाल के लिस्बन में आयोजित प्रतियोगिता 86 देशों के बच्चों ने हिस्सा लिया था , जिनमें भारत इन पांच नौनिहालों का प्रदर्शन शानदार रह्म आपको बता दकि हर वर्ष सेकंडरी व हायर सेकंडरी के लिए उटरनेशनल साहस अलॉपयाडस का होता जसको चयन प्रक्रिया अगस्त - सितंबर में होती है । पाच मियों में स्पैठिक एग्जाम : रोगी नामा संटर फॉर इस एजकेशन ( एचबीसीएसई * सारा ओलपिसि के नेशनल आनेटर प्रो . अनवेष मजुमदार की मानें , तो स्टूडेंट्स आठवीं 12वीं तक ) पसंद से फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी , एस्ट्रोनॉमी एवं जूनियर साइंस विषयों को लेकर ओलाँपयाड्स हिस्सा ले सकते हैं । यह अलग तरीक काम होता जिसमें छात्रों को उक्त विषयों की क्षमता आंकने मौका मिलता है । इससे उनमें विकसित होती है यानी वे पॉलम्स का हनोवेटिव पनि निकालना और आउट ऑफ बॉक्स सोचना
सीख जाते . हैं । दरअसल , देश के ज्यादातर शिक्षण संस्थानों थ्योरी आधारित क्लासरूम टीचिंग से । अलग ओलंपियाड्स में नये - नये प्रयोगों पर जोर दिया जाता है । ऐसे में जो स्टूडेंट्स स्कूल की प्रयोगशाला कुछ नया करने का जुनून रखते हैं , उनके लिए अंतरराष्ट्रीय साइंस ओलंपियाड्स तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान जाता है । एक्सपोजर से बढ़ता हौसला : नेशनल साइंस ओपयाड़ में हिस्सा ले चके ग्वालियर के नौवीं के देवांश गम बताते हैं , ' ओलपियाड्स से काफी एक्सपोजर मिलता से संबंधित परीक्षा में स्कूल कोर्स से इतर सवाल । जवाब देने से पहले सोचना पड़ता है और मेमोरी शार्प है । मुंबई की 12वीं की छात्रा सुहानी द्विवेदी की में बचपन से रुचि था । इसलिए टैलेंट सर्च नं ओपयाडस जैसी प्रतियोगिताओं भाग लेने कोई नहीं छोड़ा । ये आठवीं कक्षा नेशनल लेवल साइंस टैलेंट सर्च एग्जाम ( एनएसटीएसई ) के अलावा मैथ्स ओलंपियाड्स में शामिल चुकी सुहानी बताती हैं , ' ओलंपियाड्स में हर तरह के मैथ्स प्रॉब्लम आते लेकिन सवाल थोड़े से ट्विस्टेड होते हैं । अगर कॉन्सिष्ट क्लियर न हो , तो सॉल्यूशन नहीं निकाल पाएंगे । लेकिन इन एग्जाम्स में अच्छी रैंकिंग पर जो रिकग्निशन मिलती है , उससे हँसला बढ़ता है ।
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| नई-सोच-नई-उम्मीद |
होती है । है लेट की ग्रूमिंगः यह सच कि देश में टैलेंट नहीं , लेकिन बच्चों प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना आसान नहीं । प्रो . अनवेष की मानें , अंतरराष्ट्रीय साईस ओलंपियाड्स में शामिल होने की पांच स्तरीय प्रक्रिया का पहला चरण एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स देखरेख होता है , जबकि चरण मामा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन ( www hbcse . res . in कंडक्ट कराता है । तीसरे चरण एचबीसीएसई के एक्सपटर्स स्टडेंट्स को गाइड करते वैसे तो कई संस्थानों कथित रूप से ओलंपियाड प्रतियोगिता आयोजन किया जा रहा है , एचबीसीएसई द्वारा आयोजित होने वाले ओलंपियाडस न सिर्फ सरकार मान्यताप्राप्त होते हैं , बल्कि एकमात्र एजेंसी जिसके माध्यम अंतरराष्ट्रीय साइंस ओलंपियाड्स शामिल हशा सकता है । इसे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एटॉमिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेस विभागों अनुदान मिलता है । देश होने वाले अन्य ओलंपियाड्स का किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से ताल्लुक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मददः ओलंपियाडस प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह क्वैश्चंस पूछे नेशनल टैलंट सर्च जामिनेशन , किशोर वैज्ञानिक
प्रोत्साहन योजना , सीबीएसई , जेईई , नीट जैसी परीक्षाओं की ऑनलाइन तैयारी में मदद कराने वाले एजुकेशन लेटफॉर्म टॉपर डॉट कॉम के वीपी ( एजुकेशनल कंटेंट ) राजशेखर कहते हैं , ‘ साइंस ओलंपियाड्स जैसी स्वस्थ अतिस्पर्धाओं से बच्चों को कई रूपों में फायदा होता है । उनकी रीजनिंग एप्लीकेशन एवं एनालिटिकल स्किल मजबूत होती है उनमें एक साइंटिफिक टेम्परामेंट
विकसित होता है । कह सकते हैं कि इससे बच्चों 360डिग्री विकास होता है । शिक्षाविद डॉ . इंदु खेत्रपाल मानती हैं कि ओलंपियाड्स से बच्चे अपने कोर एकेडमिक । सिलेबस हटकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना सीख । अन्य स्टूडेंट्स के मुकाबले उनका बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर और बेहतर हो जाता अलग ।


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Jayda jankari kele comment kare